Friday, 14 October 2016

"अध-कच्चा प्यार"

लघु कथा सं-
शीर्षक-"अध-कच्चा प्यार"~~~ 

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वैशाख की दूपहरिया में आँख लगी ही थी कि पड़ोस से बिलखने की आवाजें आ रही थी । बाहर निकला तो पता चला निरूपमा नहीं रही, शायद हृदय से जुड़ी को बीमारी थी उसे जैसा कि लोगों ने बताया । भली-चगी तो थी आज सुबह तक अचानक? प्यारी सी नटखट लड़की, उम्र भी कोई ज्यादे नहीं 22-23 वर्ष की रही होगी । माँ ने बताया "इस बीमारी में कब क्या हो जाएँ कुछ पता नहीं, भूकंप जैसी कहानी हैं इस बीमारी की" । दाह-संस्कार के बाद पता चला, उसकी मँगनी भी हो चुकी थी अगले महीने शादी होने वाली थी लड़का किसी कंपनी में सुपरवाइजर था दिल्ली में । शादी की तैयारी घर में ज़ोर-शोर से चल रही थी, अचानक ये हादसा एक झटके में खुशी के महौल को गम में बदल दिया । वैवाहिक निमंत्रण-पत्र भी छप के आ चुकी थी बस बाकी था तो भेजना । 

सबसे बड़ी बात जो पता चली गुप्त सूत्रों से, वो ये कि वह किसी लड़के से प्यार करती थी और उससे ही शादी करना चाहती थी लेकिन बताने में देर कर दी और घरवाले समझ नहीं पाये । उसके मरने से घर की इज्जत गई वो अलग, पुलिस ने पैसे लिए वो अलग । किसी से प्यार करना अच्छी बात मगर जान देकर, अपने घरवाले से प्यार करने वाले अचानक युवावस्था में प्रवेश करते ही किसी को अपनी दुनिया समझ बैठते हैं और बेवकूफी तो देखो उस दुनिया को पाने के लिए दुनिया ही छोड़ देते हैं । 


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दो दिन बाद ही घर में सब सामान्य हो गया, किसी को उसकी बारे में बात करना तो दूर नाम सुनना भी दूभर था । अपने फैमिली से जीत ना सकी लेकिन जिंदगी की जंग तो खुशी-खुशी जीत ही सकती थी । अपने लिए खुशी को पाने के और भी तरीके, शायद निरूपमा ये बात जान ना सकी । कुछ दिनों बाद उसकी माँ रास्ते में अकेले मिली, बात करते-करते अनायास ही निरूपमा की बात आने पर रोने लगी कहने लगी उसने अच्छा नहीं किया एक आवारे लड़के के लिए हमारा नाम घिना दिया । जिस लड़के से उसकी शादी होनी थी, वो सरकारी नौकरी में बड़ा बाबू के पद पर था, घर से भी संपन्न और तो और लड़के वालों ने ही उसे पसंद किया था ।

उसे शादी उस लड़के से नहीं करनी थी पहले बता दिया होता, उसके पापा को मैं मना लेती । मगर उसने तो मेरे कोख को ही बदनाम कर दिया, हर कोई मुझे ही उसके किये के लिए ज़िम्मेवार मानता हैं । उसके पापा उस घटना के बाद उसकी माँ का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते । माँ ने अपनी बेटी को बेटे के समतुलय लाड़-प्यार दिया था, मोहल्ले की लड़कियाँ भी ऐसी माँ अगले जन्म पाने की लालसा रखती थी, उसकी इस बेवकूफी के लिए हर कोई उसकी माँ को ही तो जिममेवार मानेगा । घर आया, मुँह-हाथ धोने गया तब तक माँ खाना ले आयी ।


थके होने के कारण जल्दी-जल्दी खाया और लेट गया, आज की बातों को याद करने लगा । सहसा ही निरूपमा के माँ द्वारा कही बात याद आई, एक माँ के संवेदना को कोई समझ नहीं सकता बेटी के गुजरने पर रो भी नहीं सकती । किसी गुजर चुके मनुष्य की एक छोटी सी गलती कितनों की जिंदगी में कड़वाहट ला सकता हैं वो इस घटना समझ में आया ।


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#मिथिला #मचान 

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राम "मैथिल"
दरभंगा, मिथिला (बिहार) ।
दिनांक-२७/०४/२०१६
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